ईरान के चाबहार में पाकिस्तानी सीमा के पास अमेरिका ने किए भीषण हमले, व्यापार क्षेत्र के पास भारी बमबारी
Chabahar Iran Attack: अमेरिका ने ईरान के चाबहार में भीषण हमले किए हैं। चाबहार क्षेत्र से धमाकों की तेज आवाजें सुनी गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक चाबहार के व्यापारिक क्षेत्र में ये हमले किए गये हैं।
तेहरान: अमेरिका ने ईरान के चाबहार पोर्ट पर भीषण हमले किए हैं। चाबहार पोर्ट क्षेत्र से धमाकों की तेज आवाजें सुनने को मिली हैं। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी फाइटर जेट्स ने व्यापार क्षेत्र के पास स्थित एक पहाड़ को निशाना बनाया है। हालांकि अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि क्या ये वही इलाका है जहां भारत ने भारी भरकम निवेश कर रखे हैं या नहीं। अल जज़ीरा ने ‘वॉयस ऑफ अमेरिका’ की फारसी भाषा सर्विस के हवाले से बताया है कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने कथित तौर पर ईरान के चाबहार व्यापार क्षेत्र के पास एक पहाड़ पर स्थित सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि व्यापार क्षेत्र के पीछे एक जोरदार धमाका सुना गया।
अमेरिका का यह हमला ईरान के साथ चल रहे उसके युद्ध में एक नये फ्रंट को खोल रहा है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है और माना जा रहा है अमेरिका ने प्रेशर बनाने के लिए ऐसा किया है। यह हमला होर्मुज़ जलडमरूमध्य की चल रही नाकेबंदी और मध्य-पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान की तरफ से लगातार होने वाले हमलों के बीच किया गया है। मान जा रहा है कि इस हमले से तनाव और बढ़ेगा।
अमेरिका ने पाकिस्तान की सीमा के पास चाबहार क्षेत्र में किया हमला
ईरान ने चाबहार के जिस क्षेत्र में हमला किया है वो ईरान के पूर्वी हिस्से में पाकिस्तान सीमा के नजदीक स्थित है। अलजजीरा के मुताबिक यह क्षेत्र ईरान के दक्षिण-पूर्वी सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है जो पाकिस्तान की सीमा के बहुत नजदीक है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर काउंटर टेरेरिज्म यानि SITREP की रिपोर्ट में 11 मार्च को कहा गया था कि चाबहार में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के नौसैनिक अड्डों और जहाजों को इससे पहले किए गये हमले के दौरान निशाना बनाया गया है। चाबहार क्षेत्र में हुआ ये दूसरा हमला है।
आपको बता दें कि चाबहार बंदरगाह ईरान के मकरान तट पर स्थित है। यह ओमान की खाड़ी के मुहाने पर है और भौगोलिक रूप से यह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से सिर्फ 170 किमी दूर है। वॉइस ऑफ अमेरिका (पर्सियन) के मुताबिक ये हमले उन भूमिगत ठिकानों पर हुए हैं जिन्हें ईरान की ‘कुद्स फोर्स’ इस्तेमाल करती है।
चाबहार क्षेत्र में अमेरिका ने क्यों किया हमला?
चाबहार क्षेत्र में हमला करने के पीछे अमेरिका की बड़ी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। चाबहार, ईरान का एकमात्र ऐसा बंदरगाह है जिसकी सीधी पहुंच हिंद महासागर तक है। होर्मुज की खाड़ी में युद्ध छिड़ने पर ईरान का सारा व्यापार यहीं से होना था। इस पर हमला करके अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सप्लाई चेन को काटने की कोशिश की है। फिलहाल हमला कितना घातक है इसकी पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन अमेरिका ऐसा कर ईरान के सप्लाई लाइन को काट सकता है जैसा हार्मुज को रोककर ईरान कर रहा है।
ईरान की ‘कुद्स फोर्स’ के लिए चाबहार क्षेत्र एक बड़ा लॉजिस्टिक हब है। यहीं से ईरान अपने अफ्रीकी और एशियाई प्रॉक्सी संगठनों को हथियार और रसद सामग्री और हथियार भेजता है। यहां हमला करने का मतलब है कि ईरान के बाहरी नेटवर्क की सप्लाई चेन को तोड़ने की कोशिश की गई है।
चाबहार में हमला भारत को कितना बड़ा झटका?
चाबहार में भारत का बहुत बड़ा निवेश है। भारत ने शहीद बेहश्ती टर्मिनल में निवेश कर रखा है। यह बंदरगाह भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया का रास्ता है। फिलहाल हमले का स्केल क्या है इसका पता नहीं चल पाया है। लेकिन अगर हमले का पैमान बहुत बड़ा है तो यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और ‘इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर’ (INSTC) के लिए भी बड़ा झटका हो सकता है। लेकिन भारत के लिए झटका तब होगा जब चाबहार बंदरगाह पर हमले हुए हों और बंदरगाह पर हमले नहीं हुए हैं तो भारत के लिए झटका नहीं होगा।
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