बिहार में हो गया खेला, 4 लापता विधायकों ने पलट दी बाजी, अब इन MLAs का क्या होगा?
राज्यसभा चुनाव : बिहार राज्यसभा चुनावों में बड़ा खेल हो गया है। महागठबंधन के 4 विधायकों ने वोट नहीं डाला है। अब राज्यसभा चुनाव का परिणाम क्या होगा? इन विधायकों का क्या होगा?
बिहार की राजनीति ने एक बार फिर सभी को चौंका दिया है। राज्यसभा चुनावों में एनडीए को पांचवीं सीट जीतने के लिए 3 विधायकों की जरूरत थी। वहीं महागठबंधन को 6 विधायकों की। हर किसी की नजरें ओवैसी की पार्टी के 5 और बसपा के 1 MLA पर टिकी थी। इन 6 विधायकों को तो तेजस्वी यादव ने अपनी ओर कर लिया, लेकिन शायद एनडीए ने कांग्रेस और आरजेडी के खेमे ही सेंधमारी कर दी है।
आखिरी क्षणों तक भी महागठबंधन के 4 विधायक लापता रहे। 3 कांग्रेस के और 1 आरजेडी का विधायक। वोटिंग खत्म होने के आखिरी क्षणों तक भी ये वोट डालने नहीं पहुंचे। इन्हें बार-बार फोन किया गया, लेकिन ये लापता ही रहे। इन चारों विधायकों के वोट नहीं डालने से अब राज्यसभा चुनाव परिणाम क्या होगा? पांचवीं सीट किसके खाते में जाएगी? इन चारों विधायकों का आगे क्या होगा? आइए समझते हैं..
कौन 4 विधायक लापता
बिहार राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 3 विधायक लापता रहे और वोट डालने नहीं पहुंचे। सुरेंद्र कुश्वाहा वाल्मिकीनगर से विधायक हैं जबकि मनोज विश्वास फारबिसगंज से विधायक हैं। इन दोनों को बार-बार कॉल लगाया गया, लेकिन ये फोन ही नहीं उठा रहे हैं। तीसरे विधायक मनिहारी के विधायक मनोहर प्रसाद सिंह भी वोट डालने नहीं पहुंचे। इसके अलावा सबसे बड़ी खबर आरजेडी विधायक फैसल रहमान के गायब होने की है। फैसल रहमान ढाका के MLA हैं।
ये चारों वोट नहीं डालेंगे तो क्या होगा परिणाम
बिहार राज्यसभा में 5 सीटों के लिए मतदान हुआ। पेंच पांचवीं सीट को लेकर ही फंसा हुआ है। इस सीट पर एनडीए के उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के अमरेंद्र सिंह धारी के बीच मुकाबला था। महागठबंधन के 4 विधायकों के वोट न डालने के चलते पूरा समीकरण ही बदल गया है। क्रॉस वोटिंग तो नहीं हुई लेकिन मतदान से दूर रहने का सीधा फायदा एनडीए को होगा। एनडीए के खाते में बिहार की पांचों सीटें आ जाएंगी।
वोट न करने वाले चारों विधायकों का क्या होगा
अब सवाल उठता है कि जिन 4 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं दिया है, उनका क्या होगा? उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है? दरअसल इन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग नहीं की है। ऐसे में सीधे तौर पर इनके खिलाफ एक्शन लेना मुश्किल होगा। हालांकि पार्टी नेतृत्व इन्हें पार्टी से निकाल सकता है। लेकिन इसके बावजूद इनकी विधायकी बची रह सकती है। इनकी सदस्यता रद्द करने का अधिकार बिहार विधानसभा के अध्यक्ष के हाथों में होगा।
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