March 16, 2026
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‘बैटल ऑफ गलवान’ का बदला नाम, अब ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ टाइटल से रिलीज होगी सलमान खान की फिल्‍म

सलमान खान की फिल्‍म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का नाम अब ‘मातृभूम‍ि: मे वॉर रेस्‍ट इन पीस’ होगा। जी हां, सोमवार 16 मार्च को मेकर्स ने नया पोस्‍ट जारी करते हुए यह ऐलान किया है। सलमान खान नए पोस्‍ट में खतरनाक लुक में नजर आ रहे हैं। वह फिल्‍म में महावीर चक्र विजेता शहीद कर्नल बी संतोष बाबू का रोल निभा रहे हैं।

सलमान खान की अपकमिंग फिल्‍म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का नाम बदल गया है। जी हां, साल 2020 में गलवान घाटी में चीन के साथ लड़ी गई खूनी लड़ाई पर बनी इस फिल्‍म का नाम अब ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ होगा। यह घोषणा सोमवार, 16 मार्च को मेकर्स की ओर से की गई है। इसी के साथ फिल्‍म का नया पोस्‍टर भी जारी किया गया है, जिसमें सलमान खान का खतरनाक लुक नजर आ रहा है। हालांकि, इस नए पोस्‍टर से रिलीज डेट गायब है, जिसके बाद उन कयासों को फिर से हवा लगी है कि शायद फिल्‍म अगले महीने 17 अप्रैल 2026 को रिलीज नहीं होगी और पोस्‍टपोन होगी।

अपूर्व लाख‍िया के डायरेक्‍शन में बनी साल 2026 की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक ‘बैटल ऑफ गलवान‘ का नया नाम आधिकारिक तौर एक ऐसा संदेश देता है, जो आज की दुनिया के लिए बहुत जरूरी है। मेकर्स ने ‘मातृभूम‍ि’ को फिल्‍म का नया टाइटल बनाया है, जबकि साथ में टैगलाइन जोड़ा है- May War Rest in Peace, यानी युद्ध को शांति मिले।

‘नया नाम सलमान खान की गहरी सोच’, फ‍िल्‍म में बनेंगे कर्नल बी. संतोष बाबू

मेकर्स की ओर से जारी आध‍िकारिक बयान में कहा गया है कि ‘युद्ध’ को लेकर सलमान खान की एक बहुत बड़ी और गहरी सोच है, जो सिर्फ लड़ाई-झगड़े की बात न करके, पूरी दुनिया में शांति की उम्मीद को जगाती है। यह फिल्‍म गलवान घाटी की ऐतिहासिक घटना से प्रेरित है। सलमान खान फिल्‍म में महावीर चक्र प्राप्‍त कर्नल बी. संतोष बाबू के किरदार में हैं।

फ‍िल्‍म का पहले गाने का नाम भी ‘मातृभूम‍ि’, अब तक 21.94 म‍िल‍ियन व्‍यूज

‘बैटल ऑफ गलवान’ का पहला गाना गणतंत्र दिवस से ठीक पहले 24 जनवरी 2026 को रिलीज हुआ था। अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की आवाज में इस देशभक्‍त‍ि गीत का टाइटल भी ‘मातृभूम‍ि’ है। खबर लिखे जाने तक यूट्यूब पर इस गाने को 21.94M व्‍यूज मिल चुके हैं। सलमान खान फिल्‍मस के बैनर तले बन रही इस फिल्‍म में चित्रांगदा सिंह भी हैं।

टीजर रिलीज के बाद से ही चीन को लग रही चुनचुनी

सलमान खान की फिल्म का टीजर बीते साल 27 दिसंबर को एक्‍टर के जन्‍मदिन पर रिलीज किया गया था। इसके तुरंत बाद चीन को मिर्ची लग गई थी। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने फिल्म को लेकर जहर उगला। अखबार में छपे एक लेख में लिखा गया, ‘भारतीय फिल्म बैटल ऑफ गलवान, जो गलवान क्षेत्र में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 2020 की झड़पों पर आधारित होने का दावा करती है और अप्रैल 2026 में रिलीज होने वाली है, उसका टीजर एक्टर सलमान खान ने 27 दिसंबर को रिलीज किया। सलमान खान, जिन्हें चीनी दर्शक ‘बजरंगी भाईजान’ के लीड एक्टर के तौर पर सबसे ज्यादा जानते हैं, उनका चीन में अक्‍सर मजाक बनता है कि वह पर्दे पर बहुत ज्यादा अजेय लगते हैं। उनकी फिल्‍म की कहानी तो साधारण होती है, लेकिन विजुअल इफेक्ट इतने बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जाते हैं कि ड्रामा अवास्तविक लगता है। बॉलीवुड की फिल्में बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई कहानी दिखाती हैं। इतिहास को फिर से नहीं लिखा जा सकता। यह चीन के संप्रभु क्षेत्र की रक्षा करने के PLA के पक्के इरादे को हिला नहीं सकती।’

कौन थे महावीर कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू

कर्नल बिकुमल्ला संतोष बाबू का जन्‍म‍ 13 फरवरी 1983 को सूर्यपेट, तेलंगाना में हुआ था। वह भारतीय सेना के अधिकारी और 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर थे। साल 2020 में चीन और भारत के बीच गलवान घाटी की हिंसक झड़पों के दौरान वह शहीद हो गए। कर्नल बी. संतोष बाबू 1967 के बाद भारतीय सशस्त्र बलों के पहले कमीशन प्राप्त अधिकारी थे, और 1975 के बाद चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के खिलाफ युद्ध में शहीद होने वाले पहले भारतीय सैनिकों में से एक थे। उन्हें मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े युद्धकालीन वीरता पुरस्कार, ‘महावीर चक्र’ से सम्मानित किया गया।

साल 2020 को गलवान घाटी में क्‍या हुआ था

पूर्वी लद्दाख में PLA के साथ 2020 की झड़पों के दौरान हुई उच्च-स्तरीय बातचीत के बाद, 16 बिहार रेजिमेंट गलवान घाटी में चीनी सेना पर नजर रख रही थी, ताकि यह कंफर्म हो सके वे पीछे हट रहे हैं। लेकिन भारतीय सूत्रों के मुताबिक, 14 जून को PLA सैनिकों के एक समूह ने LAC पर तंबू और एक निगरानी चौकी लगा दी। यह 6 जून को हुए एक समझौते और ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा’ (LAC) के बारे में भारत की समझ के उलट था। कर्नल बी. संतोष बाबू ने एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और बातचीत करने की कोश‍िश की, लेकिन जल्द ही दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई और दोनों तरफ के सैनिक घायल हो गए। इसके बाद और अधिक सैनिक मदद के लिए भेजे गए। हिंसक झड़प जारी रही। भारतीय सेना ने कहा कि जवाबी कार्रवाई में, 16 बिहार रेजिमेंट के सैनिकों ने ‘कथित तौर पर’ आमने-सामने की लड़ाई में PLA के 40 से 45 सैनिकों को मार गिराया और उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि, चीन के PLA ने अपने चार सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की।

कर्नल बी. संतोष बाबू की शहादत

इस खूनी झड़प में भारतीय सेना ने एक गोली नहीं चलाई। यह लड़ाई, कटीले तारों, पत्‍थर और डंडों से लड़ी गई। कर्नल बी. संतोष बाबू इसमें गंभीर रूप से घायल हुए और शहीद हो गए। उनके पार्थिव शरीर को 17 जून को एक सैन्य विमान से तेलंगाना के हकीमपेट स्थित सैन्य हवाई अड्डे पर लाया गया। वहां से, उनके पार्थिव शरीर को गाड़ी से सूर्यपेट के केसरम गांव में स्थित उनके परिवार के फार्म तक ले जाया गया। 18 जून को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, और उनके पिता ने चिता को मुखाग्नि दी।

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