March 16, 2026
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‘भारत के RSS और RAW को बैन क‍िया जाए’, अमेरिका के रिलीजियस फ्रीडम कमीशन ने ट्रंप सरकार से की सिफारिश

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग की 2026 की वार्षिक रिपोर्ट में भी भारत को विशेष चिंता वाले देश (Country of Particular Concern) का दर्जा दिए जाने की मांग की गई है।

वॉशिंगटन: यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) ने राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ (आरएसएस) और खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) पर बैन की मांग की है। दुनिया में धार्मिक स्वतंत्रता की निगरानी के लिए बने कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से कहा है कि भारत के आरएसएस और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग पर प्रतिबंध लगाना चाहिए। कमीशन ने रिपोर्ट में आरएसएस और रॉ के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं।

यूएस के अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग की भारत के लिए की गई सिफारिशों में आरएसएस और रॉ के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों के अलावा अमेरिका नागरिकों के उत्पीड़न के आधार पर भारत को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसमें कहा गया है कि भारत और अमेरिका के भविष्य के सैन्य और व्यापारिक संबंध धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े हों।

संगठन की संपत्ति को जब्त करना शामिल

अमेरिकी पैनल ने आरएसएस पर जिन प्रतिबंधों की मांग की है, उनमें संगठन की संपत्ति को जब्त करना और उसके सदस्यों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाना शामिल हो सकता है। आरएसएस भारत में 1925 से काम कर रहा है यानी 100 साल से भी ज्यादा पुराना संगठन है। देश की खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के खिलाफ भी आयोग ने सिफारिश की है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) की 2026 की सालाना रिपोर्ट में यह सिफारिशें की गई है। रिपोर्ट को इस महीने की शुरुआत में जारी किया गया है। USCIRF अमेरिका की एक स्वतंत्र एजेंसी है, जो धार्मिक आजादी के अधिकार पर नजर रखती है और वाइट हाउस को सुझाव देती है। हालांकि वाइट हाउस ये सुझाव मानने के लिए बाध्य नहीं है।

आयोग के निशाने पर RAW

आयोग ने बीते साल 2025 में भी रॉ पर सिख अलगाववादियों की हत्या की साजिशों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए बैन की मांग की थी। आयोग की अन्य सिफारिशों में ट्रंप प्रशासन से भारत को ‘विशेष चिंता वाला देश घोषित करने की मांग शामिल है। आयोग ने भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर बीते सात साल से लगातार सवाल खड़ा किया है।

भारत उन 18 देशों में शामिल है, जिन्हें आयोग ने विशेष चिंता वाले देश के रूप में नामित करने की सिफारिश की है। इन देशों में भारत के अलावा अफगानिस्तान, म्यांमार, चीन, क्यूबा, इरिट्रिया, ईरान, लीबिया, निकारागुआ, नाइजीरिया, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान, रूस, सऊदी अरब, सीरिया, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और वियतनाम का नाम शामिल है।

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