भारत की कूटनीति काम कर गई! हमले पर पहले चुप्पी, फिर ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच कैसे बिठाया संतुलन
पश्चिम एशिया में युद्ध के 17वें दिन लगता है कि खाड़ी संकट पर भारत की कूटनीति काम करने लगी है। भारत को पहले अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने की छूट दी, फिर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से एक-एक कर इसके जहाज निकलने दिए।
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया के युद्धग्रस्त होर्मुज स्ट्रेट से बीते तीन दिनों में ईरान ने जिस तरह से भारतीय झंडे वाले तीन जहाजों को गुजरने दिया है, उससे साफ है कि भारत की कूटनीति अब रंग लाने लगी है। जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए तो भारत की चुप्पी पर सवाल उठ रहे थे। पर अब लग रहा है कि जो कुछ हुआ, उसके पीछे पूरी रणनीति थी और वह अब काम करती नजर आई है।
भारत को ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध में जबतक शांत रहना था, वह शांत रहा। लेकिन, जब मध्य एशिया में जारी लड़ाई की वजह से घरेलू हालात बिगड़ने लगे, ऊर्जा संकट पैदा होने लगा, अर्थव्यवस्था में खतरे की घंटी घनघनाने लगी तो उसमें अपने सारे कूटनीतिक घोड़े छोड़ने शुरू कर दिए।
पीएम मोदी के ईरानी राष्ट्रपति से बात करने से बदले हालात
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने स्तर पर पहले से ही मोर्चा संभाल रखा था। आखिरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद आगे बढ़कर देश के सामने पैदा हुई चुनौतियों से निपटने के लिए कमान संभाल लिया। पश्चिम एशिया में लड़ाई की वजह से देश में गैस की भारी किल्लत के बीच उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से बात की।
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने लगे एक-एक कर भारतीय जहाज
गुरुवार (12 मार्च, 2026) को पीएम मोदी की बात हुई और अगले ही दिन यानी शुक्रवार (13 मार्च, 2026) को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट होकर भारत के पहले एलपीजी टैंकर ‘शिवालिक’ को गुजरने की अनुमति दे दी। ‘शिवालिक’ के पीछे-पीछे एक और भारतीय एलपीजी तेल टैंकर ‘नंदा देवी’ भी होर्मुज स्ट्रेट से तिरंगा लहराता हुआ शान से निकल आया।
मोदी सरकार ने शुक्रवार को जानकारी दी कि दो एलपीजी टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। सोमवार को तीसरे भारतीय जहाज के भी होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल आने की जानकारी आई है।
‘ईरान-अमेरिका दोनों के साथ बैलेंस बिठा रहा भारत’
बेंगलुरु स्थित एक थिंक टैंक तक्षशिला इंस्टीट्यूशंस के फाउंडर नितिन पाई ने ब्लूमबर्ग से कहा है, ‘भारत अमेरिका और ईरान दोनों ही के साथ संबंधों में बैलेंस बिठाने की कोशिश कर रहा है।’ पाई के मुताबिक पिछले हफ्ते पीएम मोदी का ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान को फोन करना ‘डैमेज कंट्रोल’ था और इससे पता चलता है कि पहले मोदी सरकार पर अमेरिका और इजरायल के साथ होने के जो आरोप लग रहे थे, उसे ‘संतुलित’ करने की कोशिश की जा रही है।
होर्मुज से चीन और रूस के बाद भारत के जहाज निकल रहे
- ईरान पर अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को हमले शुरू किए थे और उसके बाद से चीन और रूस के जहाजों के अलावा भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिसके जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित निकल रहे हैं।
- भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है, जो होर्मुज का मार्ग बाधित होने के चलते अभी इसकी जबरदस्त किल्लत से गुजर रहा है।
- भारत करीब 90% कच्चे तेल का भी आयात करता है, जो कि 100 बैरल से ज्यादा मंहगा हो चुका है। इससे महंगाई बढ़ने का डर है, भारतीय रुपये पर भी दबाव बढ़ेगा और ट्रेडिंग रिकॉर्ड भी खराब हो सकता है।
भारत को रूस से तेल खरीदने की छूट दे चुका है अमेरिका
ईरान से पहले भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को भी पटरी पर बनाए रखने में सफल रहा है। इसी वजह से इस महीने अमेरिका ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की छूट भी दी है। यही अमेरिका पहले इसी वजह से 50% टैरिफ लगा चुका है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है और दोनों देशों में ट्रेड डील पर बात हो रही है।
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