ट्रैफिक चालान के मामलों का 14 मार्च को लोक अदालत में होगा निपटारा
बिहार के परिवहन विभाग ने सभी जिलों के परिवहन पदाधिकारियों को पत्र लिखा है। इसमें उनसे कहा गया है कि यातायात चालान के मामले लोक अदालत में सूचीबद्ध किए जाएंगे।
मुजफ्फरपुर: परिवहन विभाग ने ट्रैफिक चालान से जुड़े मामलों के समाधान की पहल करते हुए सभी जिलों के परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि वाहन चालकों के लंबित यातायात चालान के मामलों को राष्ट्रीय लोक अदालत में सूचीबद्ध करके उनका निपटारा किया जाएगा। इससे चालकों का व्यय कम होगा और कम समय में निपटारा होने से उन्हें राहत मिलेगी।
परिवहन विभाग की विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) कृष्णा कुमारी ने इस संबंध में सभी जिला परिवहन अधिकारियों (डीटीओ) को पत्र भेजा है। एक अधिकारी ने बताया कि इस व्यवस्था से लंबे समय से लंबित पड़े ट्रैफिक चालान मामलों के निपटारे में तेजी आ सकेगी।
चालान से सम्बंधित दस्तावेज मांगे
परिवहन विभाग के मुख्यालय से भेजे गए निर्देश के मुताबिक, 14 मार्च को लगने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में इन मामलों की सुनवाई होगी। इसके लिए जिलों से चालान से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट और जरूरी दस्तावेज मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
वेबसाइट और ऐप पर मिलेगी जानकारी
लोक अदालत में जाने से पहले वाहन मालिक या चालक परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या फिर मोबाइल ऐप के जरिए अपने चालान की स्थिति की जांच कर सकते हैं। वेबसाइट पर उन सभी चालानों की जानकारी मौजूद है, जिनका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। इससे यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि कौन-कौन से मामले लोक अदालत में सुनवाई के योग्य हैं।
ऑनलाइन उपलब्ध होगा रिकॉर्ड
इन मामलों से संबंधित सूचनाओं को बाद में विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करके ऑनलाइन रिकॉर्ड में रखा जाएगा। इससे भविष्य में संबंधित वाहन या चालक की ओर से की गई किसी भी तरह की अनियमितता का रिकॉर्ड विभाग आसानी से देख सकेगा और आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकेगी।
लोक अदालत में केवल छोटे मामलों का निपटारा होगा
लोक अदालत में केवल छोटे और समझौता योग्य ट्रैफिक मामलों को ही लिया जाता है। इनमें हेलमेट या सीट बेल्ट के बिना वाहन चलाना, तेज गति से वाहन चलाना, ट्रैफिक सिग्नल तोड़ना, नंबर प्लेट से जुड़ी समस्या, प्रदूषण प्रमाण पत्र का अभाव या ट्रैफिक नियमों की अनदेखी जैसे मामले शामिल होते हैं। शराब पीकर वाहन चलाने, हिट एंड रन जैसी गंभीर घटनाओं या दूसरे राज्य में जारी चालान के मामलों को लोक अदालत में शामिल नहीं किया जाता है।
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